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गीत

मैँने भर लिया आगोश मेँ चाँद को
चाँदनी पर जहाँ मेँ फेरा लगाती रही
भुला गम को ये जहाँ बसा तो लिया
उदासी पर हर शाम डेरा लगाती रही

पहले पहल बनाई तेरी तस्वीर के रँग
दोबारा फिर कागज पर उतर न सके
रातोँ के घने काले अँधेरे सँवर न सके
यूँ किरणेँ सूरज की सवेरा सजाती रही

जीने के लिये खुद को बदल तो लिया
अपनी हर ख्वाहिश को कत्ल तो किया
कैसे चलती रहेँ साँसेँ अपनी रफ्तार से
हवा जमाने की हमेँ रास्ता दिखाती रही


मोहिन्दर कुमार



गजल

बात दिल की उन्हेँ बता क्या कीजे
मुहब्बत को खबर बना  क्या कीजे

याद तेरी है  दर्द मेरे इस दिल का
तू बता इस मर्ज की दवा क्या कीजे

चाँद सूरज हैँ महमाँ तेरी महफिल मेँ
वफा की शम्मा वहाँ जला क्या कीजे

ख्वाब हजारोँ रोशन हैँ तेरी आँखोँ मेँ
अँधेरे अपने दिल के दिखा क्या कीजे

जख्म फूलोँ ने दिये बस ये शिकवा है
इस जीस्त को गुलशन बना क्या कीजे



मोहिन्दर कुमार