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डोगरी भाषा मेँ कविता

डँगरेयाँ चरान्दे चरान्दे
घा छम्मण पौँदेँ पौँदे
जिन्द्डी बेहाल होई
बिन दाँणेयाँ पराल होई

तू कुत्थु दिक्खी सकेया
खूँगेयाँ पेराँ जो घाह दित्ते
रौनकाँ देया मेरम्माँ
दिन मुज्जो तू सिआह दित्ते

बुज्झी चुक्की लौ हुण ताँ
ऐथू जुग्नू हन्न गवाह मत्ते
मर्जिया दा हुण मलाल क्यो
लादियाँ थाँहाँ दे हुँदे लाद्दे रस्ते






न जाने क्या

कभी गलियारे मेँ यादोँ के
कभी बँजारे बन राहोँ पर
जाने क्या ढूँढते हैँ हम

भूलाना था जिसे हमको
वही सब  याद करते हैँ
रेत के भँवर मेँ डूबते हैँ हम

कभी मौसम जो भाते थे
और मँजर जो लुभाते थे
उन्हीँ से आज ऊबते हैँ हम

आने वाला है अब कोई
मनाने वाला है अब कोई
खुद से जाने क्योँ रूठते हैँ हम