कभी तो खुल के बरस - चित्रा सिंह

जितना सूकून मुझे गजल सुनने में आता है शायद ही किसी और काम को करने में आता हो. दिल में एक ख्याल उठा कि क्यों न पाठकों को अपनी पसंद की कुछ गजलों से रूबरू कराया जाये. चित्रा सिंह की गायी इस गजल को बहुत से पाठकों ने जरूर सुना होगा लेकिन इसके आधे से ज्यादा शेर उस गजल में नहीं हैं. गजल के बोलों के साथ मैं ऊर्दू अल्फ़ाज(शब्दों) के अर्थ भी आपकी सहूलियत के लिये पेश कर रहा हूं.

कभी तो खुल के बरस अब्र-ए मेहरबां की तरह
मेरा बजूद है जलते हुये मकां की तरह

भारी बहार का सीना है जख्म ज़ख्म मगर
सबा ने गाये हैं लोरी शफीक मन की तरह

वो कौन था जो बरहना बदन चट्टानों से
लिपट गया था कभी बहर-ए-बेकरां की तरह

सकूत-ए-दिल तो जज़ीरा है बर्फ का लेकिन
तेरा खुलूस है सूरज के सायेबान की तरह

मैं एक ख्वाब सही आपकी अमानत हूं
मुझे सम्भाल के रखियेगा जिस्मों-जां की तरह

कभी तो सोच के वो शख्स किस कदर था बुलंद
जो बिछ गया तेरे कदमों में आसमां की तरह

बुला रहा है मुझे फ़िर किसी बदन का वसन्त
गुजर न जाये ये रुत भी कहीं खिंजा की तरह

लहू है निस्फ सदी का जिस के आबगीने में
न देख प्रेम उसे चश्म-इ-अर्गवान की तरह

इस गजल को आप यहां सुन भी सकते हैं



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अब्र, Abr: Cloud
मेहरबान, Meherbaan: Beneficent, Kind
अब्र-इ-मेहरबान, Abr-e-Meharbaan: Benevolent/quenching clouds
वजूद, Wajood: Existence, Entity
मकान, Makaan: Accommodation, House, Habitation, Place, Whereabouts
बहार, Bahaar: Bloom, Beauty, Glory, Delight, Elegance, Enjoyment, Fine Landscape, Flourishing State, Prime, Spring
सीना, Siinaa: Bosom, Breast, Chest
ज़ख्म, zaKhm: Bruise, Cut, Damage, Felon, Gash, Hack, Harm, Hurt, Injury, Loss,Sore, Wound
सबा, Sabaa: Breeze, Gentle Cool Breeze, Wind
लोरी, Lorii: Lullaby
शफीक, Shafiiq: Affectionate, Kind, Kind Hearted, Lenientबारहना, Ba-rahanaa: Bare, Naked
चट्टान, ChaTTaan: Large Rock
लिपट, LipaT: Embrace, Entangle, Wrap
बह्र, Bahr: Meter, Ocean, Rhythm, Sea, Verse
बेकरान, Be-karaaN: Vast
बह्र-इ-बेकरान, Bahr-e-BekaraaN: Vast Ocean
सकूत, Sakuut: Silence
सकूत-इ-दिल, Sakuut-e-Dil: Lonely Heart
जज़ीरा, Jaziiraa: Island
बर्फ, Barf: Ice, Snow
ख़ुलूस, Khluus: Openness, Truth, Strength Of The Relationship
सायेबान, SaayebaaN: Canopy; sunshade, umbrella, parasol; roof or fly of a tent; thatched roof
ख्वाब, Khwaab: Sleep, Dream
अमानत, Amaanat: Guardianship, Guaranty, Fidelity, Something Given In Trust, Deposit, Security
संभाल, Sambhaal: To sustain, to support, to protect, to safeguard
जिस्म-ओ-जान, Jism-o-Jaan: Body and soul
शख्स, Shakhs: A Person, Being, Body, Individual
क़दर, Qadar: Amount, Appreciation, Dignity, Honor, Magnitude, Merit, Quantity, Value, Worth
बुलंद, Buland: Exalted, Great, High, Lofty, Loud, Sublime, Tall
बिछना, Bichhna: To be spread, be laid out; to be floored; to become prostrate, lie flat; to humble oneself; to be brought or laid low
क़दमों, Qadmon: Feetबसंत, Basanth: Spring
खिज़ां, Khizaan: Autumn, Decayलहू, Lahuu: Blood
निस्फ, Nisf: Half; semi-
सदी, Sadii: A century
निस्फ-सदी, Nisf sadii: 50 years
आबगीना, Aabagiina: A crystal glass
लहू है निस्फ सदी का जिस के आबगीने में, Lahuu hai nisf sadii kaa jis ke aabaaagine mein: Vintage blood red wine in a crystal glass
प्रेम, ‘Prem’: A reference to the poet Prem Warbartoni
अर्गवान, arGavaaN: A plant whose flowers and fruit are of a beautiful red (Arbor Judæa); red colour, crimson; purple
चश्म-इ-अर्गवान, Chashm-e-arGavaaN: Something that looks red in colour, In this context – a reference to the blood red wine

3 comments:

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर गीत धन्यवाद

mahendra verma said...

बहुत अच्छी ग़ज़ल है। मैं भी अक्सर जगजीत-चित्रा को सुनता रहता हूं।

Yudhisthar raj said...

बहुत अच्छी ग़जल है। प्रेम वर्बर्टोनी साहब की