कुछ दर्द मेरे अपने
कुछ अश्क पराये भी
कुछ खामोश पीये मैंने
कुछ खुल के बहाये भी

कुछ शोखी हसीनों की
कुछ अंदाज जमाने के
कुछ कौल मेरे टूटे
कुछ वादे निभाये भी

कुछ बातें कह डाली
कुछ किस्से छुपाये भी
कुछ काटी अंधेरों में
कुछ चिराग जलाये भी

कुछ दोस्त मिले मुझको,
कुछ सिर्फ़ सौदायी भी,
कुछ याद हैं अब तक
कुछ मैने भुलाये भी

कुछ राहों में छूटे
कुछ मंजिल तक आये भी
कुछ किस्मत के धनी निकले
कुछ वक्ती सताये भी

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