प्रशासनिक पाठ -------- एक मोर पेंन्गुईन के देश में


एक समय समुन्द्र के कुछ संगठनों पर जिन्हे लेंड आफ़ पेन्गुईन्स के नाम से जाना जाता था, पेन्गुईन राज्य करते थे. वह बहुत बुद्धिमान नहीं थे, लोकप्रिय भी नहीं थे परन्तु सदा सब कामों में आगे रहते थे.
सभी उच्च अधिकारी एक ही तरह के मिलते जुलते काले और सफ़ेद सूट पहनते थे. उनका मानना था कि एकरूपता (uniformity) ही काम करने का सही तरीका है और इससे एकता (unity) बनी रहती है.

दूसरी तरफ़ कर्मचारी पक्षी रंग बिरंगी पौशाख पहनते थे जो उनके कार्यप्रणाली और व्यवहार को दर्शाता था.
जो पक्षी पदोन्नति चाहते थे और आगे बढना चाहते थे उन्हे पेंन्गुईन की पौशाक और व्यवहार अपनाना पडता था और अपने लीडर के पदचिन्हों पर चलना पडता था.

एक दिन एक मोर का पेंन्गुईन्स के देश में आना हुआ. मोर बहुत रंग बिरंगा था और उसके पास बहुत से अलग अलग प्रयोगात्मक बिचार थे. हालांकि वह अलग था परन्तु फ़िर भी पेन्गुईन्स को भा गया और उन्हे लगा कि मोर के पास भी उनके जैसी ही प्रतिभा है.
शुरुआत में पेन्गुईन्स मोर को अपने यहां पर रख कर खुश थे क्योकि वह नये नये तरीके अपनाता और उसके परिणाम भी अच्छे होते. उसका तरीका था लक्ष्य = परिणाम (हमेशा लक्ष्य पर निशाना).
जैसे जैसे समय गुजरा पेन्गुईन्स को लगने लगा कि मोर बहुत तेज बोलता है, चालाक है, बहुत ज्यादा नये नये तरीके अपनाता है और पेन्गुईन्स की शान्ति और आरामदेही में रुकावट पडने लगी है.
उधर मोर भी खुश नहीं था.. पेन्गुईन्स उसे अपनी तरह का बनाना चाहते थे और पेन्गुईन सूट पहना कर अपनी तरह का व्यवहार करवाना चाहते थे. दोनों पक्ष खुश नहीं थे.
यही आज के युग में हो रहा है. रचनात्मकता और परिकल्पना को साफ़ खुली हवा माना जाता है. बहुत से संगठनों में मोरों को चुन कर रखा जाता है परन्तु शीघ्र ही उनकी रचनात्मकता संगठन के कार्यकलाप में बाधा दिखाई देने लगती है.
हर संगठन में हमेशा मोर और पेन्गुईन्स की उपस्थिति रहेगी. कुछ कबूतर भी रहेंगे जो वहां कि शान्ति बनाये रखेंगे.. कुछ चिडिया होगीं जो हमेशा तटस्थ व नम्र होंगी. कुछ शतुरमुर्ग भी रहेंगे जिन्हें रेत में मुहं छिपाना अच्छा लगता है.
मोर भिन्नता और नये विचारों के जन्मदाता हो सकते हैं परन्तु पेन्गुईन्स के द्वारा दी गई स्थिरता को नजर अन्दाज नहीं करना चाहिये. पेन्गुईन्स को भी समझना चाहिये कि भले ही वो संगठन की रीढ हैं परन्तु बहुरूपता भी संगठन में विश्वास के साथ स्वीकार्य होनी चाहिये.
एक दूसरे की भिन्नता को स्वीकारना, एक दूसरे के विचार सुनना, नये विचारों का स्वागत करना किसी भी संगठन की प्रगति के लिये आवश्यक है. विभिन्न चमकदार रंगो के पंख वाले पक्षी एकरूपता से कार्य कर सकते हैं

आभार - बी जे गालाघर हेटले व वारन एच समिथ की एक किताब

5 comments:

Udan Tashtari said...

एक दूसरे की भिन्नता को स्वीकारना, एक दूसरे के विचार सुनना, नये विचारों का स्वागत करना किसी भी संगठन की प्रगति के लिये आवश्यक है. विभिन्न चमकदार रंगो के पंख वाले पक्षी एकरूपता से कार्य कर सकते हैं

--आपका आख्यान तो अब MIT में रखा जाना चाहिये. आप तो मेनेजमेन्ट गुरु होते जा रहे हैं. :) बहुत उत्तम एवं सरल.

Mired Mirage said...

जीवन, विशेषकर कामकाजी जीवन,सरकार आदि में जो होता है वह बहुत बढ़िया तरीके से प्रस्तुत किया गया है । पढ़वाने के लिए धन्यवाद ।
घुघूती बासूती

shobha said...

बहुत खूब मोहिन्दर जी
आज के स्माज का बहुत अच्छा चित्र खींचा है .
प्रतीक बहुत अच्छे बने है . ब्धाई

रंजू said...

क्या बात है :)..बहुत ही सुंदर ढंग से बात कही गई है यह
शुक्रिया इसको पढ़वाने के लिए समाज को बहुत सही ढंग से बताया है

अजय यादव said...

मोहिन्दर जी!
मैं समीर जी से सहमत हूँ. आप सचमुच मैनेजमेन्ट गुरु होते जा रहे हैं. बधाई!