प्रसन्नता की खोज में

जब हम बच्चे होते हैं.हम सब अपने आप को सांत्वना देते है कि जीवन जीने लायक हो जायेगा जब हम बडे होंगे हमारी शादी होगी, बच्चे होंगे.

उसके बाद जब शादी और बच्चे हो जाते हैं तो चिडचिडाते हैं कि बच्चे अभी छोटे हैं.. समझदार नहीं हैं.. जीवन सुधर जायेगा जब यह समझदार हो जायेंगे.

जब बच्चे थोडा और बडे हो जाते हैं और कहना नहीं मानते, बराबर बोलते हैं और उन्हें समझाना मुश्किल लगता है तो सोचते हैं चलो व्यस्क हो कर स्वंय समझ जायेंगे.

सोचते हैं जब हमारे पास बडी सी कार होगी..बडा सा घर होगा... या खूब घूमने को मिलेगा वही दिन जीवन के सबसे अच्छे और खुशहाल दिन होंगे.

परन्तु सच्चाई यह है कि संतुष्ट या खुश होने के लिये वर्तमान क्षण के अतिरिक्त कोई और समय नहीं है.
अभी नहीं तो कभी नहीं .

जीवन हमेशा किसी न किसी काम में व्यस्त रहेगा, कोई न कोई अवरोध आता रहेगा एंव इस सब के साथ हमें प्रसन्नता के साथ जीना सीखना चाहिये.

इस सब से मैने सीखा कि प्रसन्नता की तरफ़ कोई रास्ता नहीं जाता हां प्रसन्नता ही जीवन का रास्ता है.

हर पल जीयें..

प्रसन्नता प्राप्ति के लिये पढाई समाप्त होने की प्रतीक्षा, दस किलो भार बढने या घटने की प्रतीक्षा, नौकरी लगने की प्रतीक्षा, शादी होने की प्रतीक्षा, सोमवार से रविवार की प्रतीक्षा, मौसमों के बदलने की प्रतीक्षा सब व्यर्थ है.

प्रसन्ता एक यात्रा है पडाव नहीं
अब आप इन प्रश्नों के उत्तर सोचें

१. संसार के पांच सबसे धनी व्यक्ति
२. पांच मिस यूनिवर्स का खिताव जीतने वाली महिलाओं के नाम
३. दस नोवल प्राईज जीतने वालों के नाम

शायद सभी प्रश्नों के उत्तर आप न दें पायें... कठिन है.. बहुत से नहीं दे पायेंगे क्योंकि

तालियों की गडगडाहट हमेशा नहीं रहती
ट्राफ़ीयां धूल से अट जाती हैं
विजेताओं को लोग समय के साथ भूल जाते हैं

अब इन प्रश्नों का उत्तर सोचें

१. तीन अध्यापकों के नाम जिन्होंने आप को पढाया
२. तीन दोस्तों की नाम जो आपके बहुत करीब हैं और जिन्होंने आपकी समय पर मदद की
३. तीन लोगों के नाम जो आपके लिये विशेष हैं
४. पांच लोग जिनके साथ आप समय बिताना पसन्द करेंगे.

उत्तर आसान हैं... सभी इस का उत्तर दे पायेंगे.... क्यों ?

क्योंकि
जो व्यक्ति आप के लिये सार्थक हैं उनको आप धन, ओहदे या उनकी उपलब्धियों के कारण नहीं जानते... परन्तु वह सब आपके जीवन को कहीं न कहीं छूते हैं.

क्षण भर को सोचिये कि आप अपना नाम उपर वाली दोनों सूचियों में से किस सूची में देखना पसन्द करेंगे.

यदि हम मन के भीतर झांक कर देखें तो पायेंगे कि स्वंय की जीत ही जीवन की सबसे बडी उपलब्धि नहीं होती.. दूसरों को जिता कर जो प्रसन्नता मिलती है उसका अन्दाजा लगाना कठिन है.

यह पोस्ट अगर पल भर के लिये भी आपके मन में कोई खुशी की लौ या बदलाव ला पाई तो निश्चय ही मेरी एक बडी उपलब्धि होगी.

2 comments:

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत सार्थक कहा आपने ..खुशियाँ तो हमारे आस पास ही बिखरी है बस देखने की जरुरत है

Udan Tashtari said...

बिल्कुल सही जी!! नजरिये की बात है. जीवन में पड़ाव कैसा-यह तो चलते रहने का नाम है.