वक्त के साथ रिश्तों के मायने बदले

नजर धुंधली हुई है या आईने बदले

जलकर जिन्हें धूप से बचाया कभी

वक्ते-जरूरत रुख उन सायों ने बदले


4 comments:

निर्मला कपिला said...

जल कर जिन्हें धूप से बचाया---- वाह लाजवाब। शुभकामनायें

दिगम्बर नासवा said...

ये भी वक़्त वक़्त की बात है .... बहुत कुछ बदल जाता है ...

आचार्य जी said...

सुन्दर शेर।

रंजना said...

वाह...बहुत ही सुन्दर...