कभी तो खुल के बरस अब्रे मेहरबां की तरह - चित्रा सिंह

2 comments:

आनन्‍द पाण्‍डेय said...

प्रसंसार्ह:

शोभनम्

http://sanskrit-jeevan.blogspot.com/

राज भाटिय़ा said...

बहुत खुब सुरत जी