हर्फ़े मुहब्बत



मुकाम दोस्ती का बना कर गिरा दिया उसने
हर्फ़े-मुहब्बत खुद लिख कर मिटा दिया उसने
भला इस खाक में कहां खोये लफ़्ज मिलते है
चुन दौलत रिश्तों में फ़ासला बढा दिया उसने