विरोदाभासी चार पंक्तिया

एक दरिया के दामन में है जब रेत इतनी
जाने इस समंद्र में कितने सहरा डूबे होंगे

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जाम छोटा सा  और प्यास थी अर्स छूती
किस कदर मयकश इस जाम में डूबे होंगे

2 comments:

Kailash C Sharma said...

बहुत सुन्दर..

हल्ला बोल said...

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