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शेर


न समझ मुझे महफिल के टूटे हुए पैमानों में

है साख बहुत इस दीवाने की, अभी दीवानों में

है ख्याल धुआं हवा के साथ रुख बदल देगा

अभी वक्त लगेगा तुम्हें, मुझे भूलने भूलाने में

26 comments:

प्रदीप मानोरिया said...

बेहतरीन शेर यह माननीय अर्जुन सिंह जी पर सटीक है आज की परिस्थिति में

माधव said...

बेहतरीन शेर

हरकीरत ' हीर' said...

अभी वक़्त लगेगा तुम्हें भूलने भुलाने में ......वाह वाह ....क्या बात है .....!!

अब इतनी भी गहरी चोट मत दीजिये .......!!

Maria Mcclain said...

interesting blog, i will visit ur blog very often, hope u go for this site
to increase visitor.Happy Blogging!!!

Udan Tashtari said...

बहुत बेहतरीन..प्रदीप मानोरिया जी की बात में दम है.

अजय कुमार said...

उम्दा है ,बधाई

दिगम्बर नासवा said...

Khoobsoorat hai sher bahut hi ... lajawab ..

राकेश कौशिक said...

बहुत खूब ख्याल है

mehhekk said...

waah lajawab

vipinkizindagi said...

bahut achcha ......

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

है साख बहुत इस दीवाने की, अभी दीवानों में

waah kya baat hai ! deewana bana diya !

smsinhindi.com said...

wah - wah !! kya baat hai.

pallavi trivedi said...

bahut badiya...

Umra Quaidi said...

लेखन के लिये “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।

जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव जीते हैं, लेकिन इस समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये मानव जीवन ही अभिशाप बन जाता है। अपना घर जेल से भी बुरी जगह बन जाता है। जिसके चलते अनेक लोग मजबूर होकर अपराधी भी बन जाते है। मैंने ऐसे लोगों को अपराधी बनते देखा है। मैंने अपराधी नहीं बनने का मार्ग चुना। मेरा निर्णय कितना सही या गलत था, ये तो पाठकों को तय करना है, लेकिन जो कुछ मैं पिछले तीन दशक से आज तक झेलता रहा हूँ, सह रहा हूँ और सहते रहने को विवश हूँ। उसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह आप अर्थात समाज को तय करना है!

मैं यह जरूर जनता हूँ कि जब तक मुझ जैसे परिस्थितियों में फंसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, समाज के हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यह भी एक बडा कारण है।

भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस प्रकार के षडयन्त्र का कभी भी शिकार हो सकता है!

अत: यदि आपके पास केवल कुछ मिनट का समय हो तो कृपया मुझ "उम्र-कैदी" का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आपके अनुभवों/विचारों से मुझे कोई दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये! लेकिन मुझे दया या रहम या दिखावटी सहानुभूति की जरूरत नहीं है।

थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालों का आभारी रहूँगा।

http://umraquaidi.blogspot.com/

उक्त ब्लॉग पर आपकी एक सार्थक व मार्गदर्शक टिप्पणी की उम्मीद के साथ-आपका शुभचिन्तक
“उम्र कैदी”

ehsas said...

आपके ब्लाग पर पहली बार आया हुंं। बहुत ही सुन्दर ख्याल है। अगर कोई भुल जाए तो वो प्यार ही क्या

Resume said...

बहुत ही खुबसूरत है|

Rashmi savita @ IITR said...

achha likha hai... nayab -ek shabd!
kabhi hamare blog par aayenge toh hame achha lagega ..

swapneshchauhan said...

bahut khoob.....

अनंत आलोक said...

बहुत खूबसूरत शेर ....!!

vipin said...

bahut hi shaandar hai yeh sher!!!!!!!!!!1bahut pasand aaya!!!!!!!

Latest Bollywood News said...

Very Very Nice Blog Thanks for sharing with us

प्रकाश बादल said...

बहुत खूब साहब! ज़िन्दाबाद!

कीर्ति कुमार गौतम said...

मजा आ गया

केतन said...

Bhai wah sahab ... :) Khoobsurat !!

YUSUF said...

nice

Dj Anurag said...

Behtreen...बधाई!!!!