शेर


चमकते चांद को क्यों धरा पर लाना चाहते हो

क्यों पूरे फ़लक को अंधेरों में डूबाना चाहते हो

ऊबर कर इस खुदगर्जी से जरा सोचो तो तुम

क्यों अपने लिये यह सारा जमाना चाहते हो


2 comments:

राज भाटिय़ा said...

वाह वाह जी बहुत सुंदर

rajeev matwala said...

sahitya srowar me saurabh vikirya kar raha hai. sundar hi nahi ati saudr hai.