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शेर - चार पंक्तिया
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हर्फ़े मुहब्बत
मुकाम दोस्ती का बना कर गिरा दिया उसने
हर्फ़े-मुहब्बत खुद लिख कर मिटा दिया उसने
भला इस खाक में कहां खोये लफ़्ज मिलते है
चुन दौलत रिश्तों में फ़ासला बढा दिया उसने
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