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पियूष दादरीवाला - अनोखी प्रतिभा के मालिक

उल्‍टे अक्षरों से लिख दी भागवत गीता: मिरर इमेज शैली में कई किताब लिख चुके हैं पीयूष : आप इस भाषा को देखेंगे तो एकबारगी भौचक्‍क रह जायेंगे. आपको समझ में नहीं आयेगा कि यह किताब किस भाषा शैली में लिखी हुई है. पर आप ज्‍यों ही शीशे के सामने पहुंचेंगे तो यह किताब खुद-ब-खुद बोलने लगेगी. सारे अक्षर सीधे नजर आयेंगे.  इस मिरर इमेज किताब को दादरी में रहने वाले पीयूष ने लिखा है. इस तरह के अनोखे लेखन में माहिर पीयूष की यह कला एशिया बुक ऑफ वर्ल्‍ड
रिकार्ड में भी दर्ज है.



मिलनसार पीयूष मिरर इमेज की भाषा शैली में कई किताबें लिख चुके हैं.
उनकी पहली किताब भागवद गीता थी. जिसके सभी अठारह अध्‍यायों को इन्‍होंने मिरर इमेज शैली में लिखा.  इसके अलावा दुर्गा सप्‍त, सती छंद भी मिरर इमेज हिन्‍दी और अंग्रेजी में लिखा है. सुंदरकांड भी अवधी भाषा शैली में लिखा है. संस्‍कृत में भी आरती संग्रह लिखा है. मिरर इमेज शैली में हिन्‍दी-अंग्रेजी और संस्‍कृत सभी पर पीयूष की बराबर पकड़ है. 10 फरवरी1967 में जन्‍में पीयूष बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं. डिप्‍लोमा इंजीनियर पीयूष को गणित में भी महारत हासिल है. इन्‍होंने बीज गणित को बेस बनाकर एक किताब 'गणित एक अध्‍ययन' भी लिखी है. जिसमें उन्‍होंने पास्‍कल समीकरण पर एक नया समीकरण पेश किया है. पीयूष बतातें हैं कि पास्‍कल एक अनोखा तथा संपूर्ण त्रिभुज है. इसके अलावा एपी अधिकार एगंल और कई तरह के प्रमेय शामिल हैं. पीयूष कार्टूनिस्‍ट भी हैं. उन्‍हें कार्टून बनाने का भी बहुत शौक है.

पियूष जी का मोबाईल नम्बर है   09654271007

एक तरबूज - अनेकोंनेक रूप... वाह भई वाह

यूं तो तरबूज से अभी परिचित हैं... गर्मीयों में राहत देने वाला एक फ़ल.. परन्तु क्या आप तरबूज के इस रूप से भी परिचित हैं....  निश्चय ही यह रूप उस रूप से भी ज्यादा लुभावना है.... देखिये और बताईये..... है कि नहीं ?












बेवकूफ़ी भरे प्रश्न - उत्तर न आता हो तो ब्लड प्रेशर न बढायें...नीचे देखें

आपकी तस्सली के लिये प्रश्नों के उत्तर नीचे दिये गये हैं.

प्रश्न १:  राम सीता है तो राम कौन है ?

प्रश्न २: एक मद्रासी ने कहा कि वो "Heart is Umbrella" फ़िल्म देखना चाहता है.... यह कौन सी फ़िल्म है ?

प्रश्न ३: वो क्या है जो दिल में है,  मन में है मगर धडकन में नहीं ?

प्रश्न ४: आप उस आदमी को क्या कहेंगे जो हिन्दुस्तान छोड कर जा रहा है ?

प्रश्न ५: कालीदास के उस भाई का नाम जो जूते बनाता था ?

प्रश्न ६: वो क्या चीज है जो टूटने के बाद काम की होती है ?

प्रश्न ७: दो  चीजें जो आप नाश्ते (Breakfast)  से पहले नहीं खा सकते ?

प्रश्न ८: अगर बसन्ती की मौसी ठाकुर को राखी बांधे तो उसका बसन्ती से क्या रिश्ता हुआ ?

प्रश्न ९:आप चार जीरो एक साथ कैसे लिखेंगे ?

प्रश्न १०: पाकिस्तान का वो कौन सा शहर  है जहां हर लडकी शादीशुदा कहलाती है ?

प्रश्न ११:  एक आदमी की प्रमोशन हुई दूसरे दिन वह रास्ते में एक पेड पर चढ कर बैठ गया.... बताओ क्यों ?

प्रश्न १२: आदमी सब से ज्यादा माफ़ी किस के सामने मांगता है ?
प्रश्न १३:  क्या कंगारू एफ़िल टावर से ऊंची छलांग लगा सकता है ?
प्रश्न १४:  महिलायें अपना समय और पैसा दिमाग बढाने कि बजाये  सुन्दर दिखने पर क्यों लगाती हैं?

प्रश्न १५: ऐसा कौन है जिसे आप गले लगायें और वो आपका गला दबाये.

सोचिये



सोचिये



सोचिये


चलिये बता ही देते हैं


उत्तर १:  दर्जी                                 (Tailor)
उत्तर २: दिल चाहता है                 (Dil Chhata hai)
उत्तर ३: आमीर खान                     (Amir Khan)
उत्तर ४: हिन्दुस्तान लीवर             (Hindustan Lever)
उत्तर ५: ऎडीदास                            (Adidas)
उत्तर ६: अंडा                                  (Egg)
उत्तर ७: लंच और डिनर                (Lunch and Dinner)
उत्तर ८: कोई रिश्ता नहीं... ठाकुर के हाथ जो नही थे राखी बंधवाने के लिये
उत्तर ९:  क्या ऐसे ०००० नहीं...  4017   
उत्तर १०:  मिंयावाली                      (Mianwali)
उत्तर ११: पूछने पर उसने बताया कि वो अब Branch Manager हो गया है.
उत्तर १२: भिखारी के सामने  "माफ़ करो बाबा"
उत्तर १३: हां क्योंकि एफ़िल टावर छलांग नहीं लगा सकता.
उत्तर १४: क्योंकि वह जानती है पुरुष बेवकूफ़ हैं पर अंधे नहीं
उत्तर १५: आप की टाई (Neck Tie)

क्या से क्या हो गया - वक्त की मेहरबानी से


हमेशा से अपुन के ये हाल नहीं थे
न समझना कि पहले बाल नहीं थे
लहराती थी  सिर पर  काली घटायें
चांद पे अपनी कोई सवाल नहीं थे

1980
 
2008

चमका है मुक्कदर लोग हैं कहते
सुनकर हम अक्सर चुप हैं रहते
तेली करिशमा है या रहमते-शेम्पू
धुलाई में हैं बाल खुलकर बहते

मोना लीजा पेंटिग - एम एस पेन्ट के माध्यम से

लियोनार्डो दा विन्सी की विश्व प्रसिद्ध पेंटिग मोना लीजा के बारे में कौन नहीं जानता.  न जाने कितना समय और कितनी मेहनत लगा कर इस कलाकार ने यह पेंटिग बनाई होगी.  समय बदल गया है...... अब देखिये कि मोना लीजा जैसी पेंटिंग को एम एस पेन्ट की मदद से किस तरह मिन्टों में बनाया जा सकता है.

इस पेंटिंग के बारे मे अधिक जानकारी आप इस लिन्क पर पायेंगे.



इस पोस्ट पर अपनी टिप्पणी (comment) देने का कष्ट करें.

विश्व रिकोर्डस में - सबसे बौना पुरुष, सबसे बौना लडका और सबसे बौनी लडकी



रूस की स्वेतलाना पंकरातोवा विश्व की सबसे लम्बी टांगों की
(132 सैंटीमीटर) यानी (52 इंच) की मालकिन हैं.  और उनके साथ जो महानुभाव आपको दिखाई दे रहे हैं वह हैं संसार के सबसे बौने पुरुष "पिन्गपिन्ग" चीन से हैं जिनकी लम्बाई 2 फ़ीट 5 इंच हैं.
यह तस्वीरें गिनीज वर्ल्ड रिकोर्ड्स पुस्तक-2009 की परमोशन के समय ली गई थी.

पिन्गपिन्ग का 16 मार्च 2010 के दिन 21 वर्ष की आयु में स्वर्गवास हो गया.

गिनीज बुक आफ़ वर्ल्ड रिकोर्ड वर्ष 2011 संस्करण के अनुसार एडवर्ड नीनो हर्नान्डेस विश्व के सबसे छोटे कद के (जीवत) पुरुष हैं. इनकी आयु 24 वर्ष है और यह बोगोटा, कोलम्बिया में रहते हैं. इनकी लम्बाई केवल 27 इंच (70 सैंटीमीटर) है. इनका भार केवल 10 किलोग्राम है. इन्हें डांस और घूमना बहुत पसन्द है. यह जैकी चेन से मिलना चाहते हैं और एक मर्सीडिज कार इनका सपना है. परन्तु जल्द इनका स्थान नेपाल के खगेन्द्र थापा मागर 18 वर्ष की आयु होते ही ले लेंगे. यह मात्र 22 इंच लम्बे हैं.




एडवर्ड नीनो हर्नान्डेस के अन्य 31 रोचक चित्र  इस लिन्क पर उपलब्ध हैं.











नेपाल के खगेन्द्र थापा मागर (भावी दावेदार) का एक चित्र
क्या आप जानते हैं कि संसार की सबसे छोटी लडकी भारत वर्ष से है.  इसका नाम ज्योति है जो कि 14 वर्ष की है और दो वर्ष के औसत बच्चे से भी छोटी दिखती है. इसकी लम्बाई मात्र 1 फ़ुट 11 इंच (58 सैंटीमीटर) है और भार केवल 5 किलोग्राम है. वह नागपुर से हैं और इनकी माता श्रीमति रंजना आम्गे (45)  और पिता श्री किशन आम्गे (52) बताते हैं कि ज्योति जन्म के समय बिल्कुल सामन्य थी उन्हे ज्योति की बिमारी के बारे में पांच वर्ष की आयु में पता चला,  ज्योति अपनी इस रुकावट से मायूस नहीं है वह स्कूल जाती है और खुश रहती है.  उसके कुछ चित्रों से इस बात का आप अन्दाजा लगा सकते हैं.


हमारी धरती पर सबसे बडा गड्ढा - Biggest Hole on Our Earth

हमारी धरती पर सबसे बडा गड्ढा रशिया (रूस)  के  पूर्वी साईबेरिया में मिरना शहर के पास है  जो कि हीरों की एक खदान है .  यह 525  मीटर गहरी और 1.25 किलो मीटर का व्यास लिये हुये है.  इस गड्ढे के ऊपर से गुजरने वाले हैलीकाप्टर चूषकीय दाव के कारण दुर्घटना ग्रस्त हो जाते थे जिसकी वजह है इसके ऊपर से उडान की मनाही है.

इसके कुछ चित्र आपके लिये प्रस्तुत हैं

प्रथम दो चित्र सेटलाईट से लिये गये हैं






पोल परिणाम - आप ब्लोगिंग किन कारणों से करते हैं

पोल परिणाम जानने के लिये आप इस लिन्क पर जायें

दूसरा पोल पहले दस हिन्दी ब्लोग की रेंकिग के लिये होगा. सब ब्लोगर्स से अनुरोध है कि वह जिन ब्लोगों को पहले दस की श्रेणी में रखते हैं उन चिट्ठों के नाम मुझे मेल पर या टिप्पणी की मार्फ़त 15 अगस्त, 2009 तक भेज दें ताकि पोल के द्वारा जाना जा सके कि कौन से ब्लोग इस समय लीड ले रहे हैं.

ब्लोगर्स पोल - १ आप ब्लोगिंग किन कारणों से कर रहे हैं ?

मैने अपने ब्लोग पर परिक्षणार्थ एक पोल लगाया था. कुछ ब्लोगर्स ने इसे गंभीरता से लिया कुछ ने मजाक में. जिन्होंने इसे गंभीरता से लिया उनके सुझाव के अनुसार मैंने कुछ और विकल्प जोडे हैं.

मेरा इरादा ब्लोगिंग से जुडे पहलुओं पर कुछ आंकडे इक्कठे कर एक लेख के रूप में सबके सामने रखने का है. यह कार्य ब्लोगिगं से जुडे सभी साथियों के गंभीर चिन्तन और सहयोग के बिना संभव नहीं है. आप सब से अनुरोध है कि इस प्रयास को सफ़ल बनाने के लिये इस पोल में हिस्सा लें. आप अधिक से अधिक तीन विकल्प चुन सकते हैं. यह पोल 31 जुलाई रात दस बजे तक खुला रहेगा.


वोटिंग के लिये आप इस लिन्क को क्लिक करें

टिप्पणी और ट्रेफ़िक पर हिन्दी ब्लाग जगत का सर्वेक्षण परिणाम

पिछले कुछ दिन इसी परीक्षण में गुजरे कि ऐसा क्या लिखा या पोस्ट किया जाये जिससे अपने ब्लोग पर भी रीडर्स का ग्राफ़ कम से कम इतना ऊंचा तो हो जाये कि दिल को तसल्ली हो. वैसे तो लिखने वाले बहुत कुछ लिख रहे हैं.. मुझ से कहीं अधिक अच्छा और आकर्षक परन्तु उन ब्लाग पर जा कर भी सन्नाटा ही हाथ लगा. बस खोपडी खुजलाई और सोचा कि थोडा शोध किया जाये कि लोगों को क्या पसन्द है. यहां एक बात साफ़ कर दूं कि पसन्द करने या यूं कहिये पोस्ट तक पहुंचने वालों .. चाहे वह उसे बाद में पढे या न पढें .. और टिप्पणी देने वालों की संख्या में जमीन आसमान का अन्तर है. इसका एक कारण शायद यह हो सकता है कि वह अपनी पोस्ट लिखते लिखते ही इतने थक जाते हैं कि टिप्पणी देने के लिये हिम्मत बचती ही नही.

विषय पर वापस आ जाते हैं कहीं यह न लगने लगे कि लिखना तो कुछ और था और लिख कुछ और दिया.

परीक्षण की इस कडी में पहले एक पांच छ: लाईन का एक विचार पोस्ट किया. मुझे लगा पहले की तरह एक दो टिप्पणी से ज्यादा कुछ मिलने वाला नहीं है मगर आशा की विपरीत 9 तिप्पणी टपकी. उस दिन साईट पर ट्रेफ़िक भी ठीक ठाक रहा.

उसके बाद की दो तीन पोस्ट में चित्र और एनीमेशन पोस्ट किया... ट्रेफ़िक तो ठीक था मगर टिप्पणी नदारद... दो दो से ही काम चलना पडा .. उसमे से भी एक सदाबहार समीर लाल जी की टिप्पणी.

फ़िर एक चुटकला पोस्ट किया .. टिप्पणी तो 7 ही मिली मगर ट्रेफ़िक कमाल का रहा... ग्राफ़ 80 को छू गया. समीर जी ने ग्राफ़ देख कर चुटकी भी ली कि अब से मैं सिर्फ़ चुटकले ही लिखा करूं.

इसके बाद हमने दूसरे ब्लाग छानने की ठानी कि कौन कौन क्या क्या लिख रहा है और उनको कौन कौन पढ और टिप्पणी दे रहा है. इसी कडी में एक ही मिलते जुलते शीर्षक पर दो पोस्ट मिली... एक ओरिजनल जिस पर 47 टिप्पणियां थी और बहुत सी टिप्पणियों को हटा दिया गया था. दूसरी पोस्ट उसी पोस्ट पर आधारित थी.. शीर्षक रूप से मगर बहुत कुछ और पढने के बाद ओरिजनल पोस्ट का संकेत दिया गया था.

आप कहेंगे कि इतनी राम कहानी क्यों सुनाई जा रही है तो आईये अब इससे जो निष्कर्ष निकले उन पर भी कुछ रोशनी डाली जाये कि टिप्पणियों और ट्रफ़िक के लिये क्या किया जाये.

१. कम से कम शब्दों में लिखी सार गर्भित रचना को ही पाठक पढ और पचा पाते हैं और यदि वह लीक से हट कर हुई तो उस पर टिप्पणी भी टिपा देते हैं.

२. ले दे के काम चलाओ... मतलब.. मतलब तो साफ़ हो टिप्पणियां करो और टिप्पणियां पाओ.

३. कोई कन्ट्रोवर्शिल पोस्ट डालो और पाओ टिप्पणियां और ट्रेफ़िक बल्ले बल्ले

४. गंभीर कि जगह कोई लाईट पोस्ट जो कुछ टेन्शन कम कर हंसा सके जैसे चुटकला. कार्टून आदि.. अगर बासी न हुआ तो कुछ कमाल कर सकता है.

५. कुछ ऐसा जो सिर्फ़ बुद्धिजीवियों की समझ में आये और टिप्पणियां पढ कर दूसरे भी टिप्पणी करने पर बाध्य हो जायें

६. टिप्पणी के लिये तो नहीं मगर ट्रेफ़िक के लिये एक कारगर उपाय है... कोई भडकीला, रंगीला, चटकीला.. धांसू जैसा कि हिन्दी समाचारों के शीर्षक होते हैं.. अपनी पोस्ट के लिये शीर्षक दीजिये और.. लोग दनादन आपके ब्लाग पर नजर आयेंगे.

यदि आप इसे पढते हैं और इस पर अमल करते हैं तो यह एक गंभीर पोस्ट है.. यदि आप इसे पढ कर इस पर अपनी पोस्ट के बारे में लिखने पर नाराजगी जाहिर करते हैं तो यह एक कंट्रोवर्शिल पोस्ट है.. अगर आपको इसे पढ कर हंसी आती है तो यह एक लाईट पोस्ट है.. और हां धांसू शीर्षक तो मैं इसे दे ही रहा हूं... हर हाल में मेरा ही फ़ायदा है... टिप्पणी न सही..ट्रेफ़िक तो आने ही वाला है.

अमीर खुसरो की पहेलियों के उत्तर

पिछली पोस्ट में पूछी गई अमीर खुसरो की पहेलियों के उत्तर निम्न हैं..

१. पान (beetle leaf_
२. कैंची (scissors)
3. औले (hailstone)
4. बिजली (lightening)
5. आईना (mirror)
6. दुल्हन (bride)
7. ईश्क (love)
8. आदम (adam)
९. नदी (river)
10. मोमबत्ती (candle)

अमीर खुसरो की पहेलियां - बूझो तो जाने

अमीर खूसरो की पहेलियां आपके समक्ष हैं अब आप सिर खुजाईये और उत्तर ढूंढिये.... देखें आप के कितने जबाब सही हैं....
पहेलियॊं के उत्तर दो दिन बाद की पोस्ट में प्रकाशित किये जायेंगे...


१. एक गुणी ने यह गुण कीना
हरियल पिन्जरें में दीना
देखो जादूगर का कमाल
डाले हरा, निकाले लाल.......बोलो क्या ?

२. भीतर चिलमन बाहर चिलमन
बीच कलेजा धडके
अमीर खुसरो यूं कहे वो दो दो उंगल सरके..... बोलो क्या ?

३. उज्जवल अतीत मोती बरानी, पायी कवन्त मोये धरनी
जहां धरी, वहां नहीं पायी, हाट बाजार सभे ढूंढ आयी
अये सखी अब कीजे का ? पी मांगे तो दीजे का ?..... बोलो क्या ?

४. अपने समय में एक नार आये
टूक देखे और फ़िर छुप जाये
मोहे अचम्भा आवत ऐसे
जल मेइन अग्नी बस्त है कैसे ..........बोलो क्या ?

५. एक पुरुख है सुन्दर मूरत, जो देखे वो उसी की सूरत
फ़िक्र पहेली पायी ना, बूझन लगा आई ना........... बोलो क्या ?

६. बनी रंगीली शर्म की बात, बे मौसम आयी बरसात
यही अचम्भा मुझ को आये, खुशि के दिन क्यों रोती जाये..... बोलो क्या ?

७. गुप्त घाव तन में लगायो और जिया रहत बैचेन
ओखड खाये दुख बढे, सो करो सखी कछु वैन ........ बोलो क्या ?

८. विधना ने एक पुरुख बनाया
त्रिया दी और नेह लगाया
चूक हूई वा से ऐसी
देश छोड हुआ परदेसी.............. बोलो क्या ?

९. नर नारी कहलाती है
और बिन वर्षा जल जाती है
पुर्ख से आये पुर्ख में जाये
न दी किसी ने बूझ बता्ये.............. बोलो क्या ?

१०. इक नारी के सर पर है नार
पी की लग्न में खडी लाचार
सीस छुए और चले न जौर
रो रो कर वो करे है भौर.................बोलो क्या ?

आपके उत्तर की प्रतीक्षा रहेगी .

परिचर्चा

www.sahityashilpi.com पर एक नया मासिक स्तंभ "परिचर्चा" आरम्भ किया जा रहा है. इस स्तंभ में हर माह किसी एक राष्ट्रीय अथवा प्रदेशीय महत्वपूर्ण विषय पर पाठकों / चिट्ठाकारों से उनकी राय आमंत्रित की जायेगी. इस बार का विषय है " स्वतंत्रता के छ: दशक - क्या खोया क्या पाया". आप अपनी राय 100 se 150 शब्दों में 12.10.2008 तक sahityashilpi@gmail.com पर भेज दें. 20 अक्टूबर, 2008 के दिन सभी विचारों को संकलित कर प्रकाशित किया जायेगा.

सभी से सहयोग की आशा है.

साहित्य शिल्पी के लिये मोहिन्दर कुमार

मां भवानी को मोहिन्दर कुमार का नमस्कार

मां भवानी मैने सोचा था कि तुम मां हो... बच्चे के दिल की बात समझ जाओगी.. मगर तुम भी वैसी ही निकली जैसा जमाना है... यानि कि सौतेली मां.

मैं जो रोया वह अपने लिये नहीं था... उन सबके लिये था जो अगली बार "तरकश के तीर" का शिकार होने वाले हैं. हो सकता है उनमें से तुम्हारा कोई प्रिय बालक भी हो.

कविता या कहानी का स्तर किसी प्रशस्तिपत्र या ट्राफ़ी से ऊंचा नहीं हो जाता.... उसे ऊंचा बनाते हैं पढने वाले और आपकी लिखने की शैली से तो लगता है कि आपका इन दोनों विधाओं से दूर दूर तक का नाता नहीं है.


नाम "मां भवानी" रखा है तो कुछ नाम का ही ध्यान रख कर लिख लो क्यों अपने लिये नर्क के द्वार खोलने का इन्तजाम कर लिया है. मुझे पता है कि मुझे कितने लोग जानते हैं... कम ही सही मगर अच्छे काम के लिये जानते होंगें मगर तुम्हारा तो नाम ही सुन कर लोग दूसरी तरफ़ सरक लेते हैं :) सच कह रहा हूं.. एक भला किया है आपने मेरा.... मेरी इस पोस्ट पर मुझे काफ़ी हिट मिलने वाले हैं.... एक और पोस्ट लिखोगी तो मुझे भी एक और पोस्ट लिखने का मौका मिलेगा.... सो लिखती रहना........

जै काली मैया की
जिस पोस्ट के जबाब में यह पोस्ट लिखी गई है उसका लिन्क यह है "मां भवानी"

ब्लोगर्स डारेक्टरी / ब्लोगर्स कोष

हिन्दी चिट्ठा जगत का विस्तार दिनों-दिन जारी है और मेरे विचार से आने वाले समय में बहुत तेजी से हिन्दी चिट्ठों और चिट्ठाकारों की संख्या बढेगी. एक दूसरे को पढने के साथ साथ यदि हम एक दूसरे के संपर्क में रहेंगे तो सोने पर सुहागा होगा. इसी मंशा से मैं चाहता हूं कि हिन्दी चिट्ठाकारों की एक डारेक्टरी बनाई जाये जिसमें निम्न जानकारियां हो सकती हैं...

१. चिट्ठाकार का नाम

२. चिट्ठे का नाम

३. चिट्ठाकार का ईमेल पता

४. चिट्ठाकार का फ़ोन नम्बर

५. चिट्ठाकार का पता

६. चिट्ठाकार का कार्यक्षेत्र

इसके अतिरिक्त कोई अन्य जानकारी यदि वांछनीय हो तो बढाई जा सकती है.

मेरा तकनीकी जानकारी रखने वाले चिट्ठाकारों से अनुरोध है कि वो एक पेज बनायें जो नेट पर उपलब्ध हो और जिसमें सब चिट्ठाकार अपनी जानकारी डाल सकें. इस तरह हम एक दूसरे के और नजदीक आ पायेंगे.

आशा है इस विषय पर सब चिट्ठाकार अपने अपने सुझाव देने का कष्ट करेंगे. इसके अतिरिक्त एक चिट्ठाकार कोष का भी गठन किया जा सकता है.. जिसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों (कविता, कहानी, लेख और अन्य विधाओं ) मे श्रेष्ट लेखन के लिये पुरस्कार दिये जा सकें.

आपके सुझावों की प्रतीक्षा में.

सिगरेट और आदमी

सिगरेट का धुआं आदमी से जीत जाता है क्योंकि



सिगरेट अपना काम करती है और आदमी नहीं



धुंआ जीत जाता है क्योंकि WILL POWER से WILLS POWER ज्यादा शक्तिशाली होती है



आदमी हमेशा स्वर्ग की कल्पना करता है और सिगरेट स्वर्ग तक जल्दी पहुंचाने में मदद करता है



सिगरेट की बदबू को इत्र, सेन्ट, पान की महक से ना छुपाय़ें.. यह छुपने वाली नही है.. और उभर कर आयेगी



यदि आप को अपने आप से और अपने प्रियजनो से प्यार है तो सिगरेट से दूर रहें

लेख में दिये आंकडों का सत्यापन कितना आवश्यक ?


दैनिक हिन्दी समाचार पत्र "राष्ट्रीय सहारा" में श्री अरविन्द खरे का एक लेख पढा "इंटरनेट पर हारती हिन्दी" जिसको स्केन कर के आपके समक्ष रख रहा हूं. लेख में काफ़ी सारे आंकडे दिये गये हैं उनका आधार क्या है मैं नहीं जानता परन्तु एक जगह उन्होंने लिखा है.

" इस समय इंटरनेट में हिन्दी में २० अच्छी पत्रिकायें चल रही हैं. इनके पढने वालों की अच्छी तादाद है. उन्होंने एक स्तर बनाया हुआ है. इनमे से कुछ हैं अभिव्यक्ति, सजनगाथा, शब्दांजलि, साहित्य कुंज, छाया, गर्भनाल, भारत दर्शन इत्यादि."

यह लेख निगाहों से गुजरा ही था कि मेरी बातचीत गूग्ल टाक पर श्रीमति पूर्णिमा बर्मन जी से हुई जो अनुभूति और अभिव्यक्ति दोनों जाल पत्रिकाओं से जुडी हुई हैं. जब मैने उनसे इस लेख का जिक्र किया तो उनकी प्रतिक्रिया कुछ इस तरह से थी जिसे मैं उन्ही के शब्दों में नीचे दे रहा हूं... और इसके लिये मैने उनसे अनुमति भी ले ली है.

"Purnima: अरविंद खरे जी का यह लेख निहायत आउट डेटेड और अज्ञानतापूर्ण जानकारी से भरा हुआ है। उदाहरण के लिए अधिक प्रचलित वेब पत्रिकाओं में शब्दांजलि का नाम है जो एक साल से भी अधिक समय से बंद पड़ी है यहाँ तक कि उसका डोमेन भी एक्सपायर हो गया है। दूसरे शब्दों में कहें तो नामो-निशान तक नहीं है। छाया नाम की कोई पत्रिका है ही नहीं वह तो लेखकों के चित्रों वाला ब्लॉग है जिसमें सिर्फ़ फोटो हैं। सृजनगाथा वेब पर है ज़रूर लेकिन उसका प्रमुख क्षेत्र प्रिंट मीडिया है जैसे हंस। भारत-दर्शन ऐसी पत्रिका है (अगर वह पत्रिका है तो) जो साल में शायद ही एक बार अपडेट होती है। अंतिम संपादकीय जुलाई 2007 से भी पहले का लिखा हुआ मालूम होता है। गर्भनाल तो वेब पत्रिका है ही नहीं वह पीडीएफ़ पत्रिका है और वेब पर नहीं अपने कंप्यूटर पर डाउनलोड करने के बाद ही पढ़ी जाती है और ऐसी पत्रिकाओं को शामिल करना ही है तो पहले नंबर पर नया ज्ञानोदय के साथ कम से कम सनद का नाम तो लिया ही जा सकता हैं।

दूसरी ओर तमाम हिंदी जाल पत्रिकाएँ जो अच्छा काम कर रही हैं जैसे कृत्या, हिंदी नेस्ट, हिन्द युग्म, दैनिक जागरण और वेब दुनिया के साहित्य और परिवार संस्करण, हिन्दी साहित्य सरिता, रचनाकार, वाटिका, हिंदी सेतु आदि का कहीं नाम तक नहीं है। नई नवेली लेखनी भी एक साल से नियमित प्रकाशित हो रही है। अगर सिर्फ़ पत्रिकाओं के नाम लेने में इतनी गड़बड़ी है तो आँकड़ो के संकलन में कितनी गड़बड़ी होगी उसका अंदाज़ लगाना काफ़ी आसान है। जो लोग समझते है कि अंतरजाल सत्यवादी लोगों के ब्रह्मवाक्य का निश्चित मानदंड है उनको इंटरनेटवर्ल्डस्टैट्सडाटकाम के यहाँ दिए गए आँकड़ों से सबक लेना चाहिए और आँकड़े कहीं से आँख बंद कर के उठा लेने की बजाय खुद भी वेब खंगाल कर देखना चाहिए। आखिर पत्रकारों का भी कुछ दायित्व होता है, कम से कम इस तरह की निगेटिव रिपोर्टिंग करते समय। "

मुझे श्रीमति पूर्णिमा जी से बात करते हुये जब पत्रिकाओं के नाम के बारे में जो लेख में दिये गये हैं इतना विरोधाभास लगा तो बाकी के आंकडों के बारे में क्या कहा जाये. निश्चय ही एक रिपोर्टर की यह जिम्मेदारी बनती है कि जो आंकडे लेख में दिये जा रहे हैं उनका अपने तौर पर एक बार सत्यापन कर लिया जाये.

लिखने से पहले यह भी जान लें कि पाठक काठ के उल्लू नहीं वर्ना सजग पाठक हैं और वह स्वयं भी लेखन के लिये मसाले की तलाश में रहते हैं... अत: मौका न दें :)



तरकश पुरस्कार - २००७

मैं उन सभी मित्रों का आभारी हूं जिन्होंने मेरे लिये मतदान किया है.